मैँ एक...

मैँ एक अदना मनुष्य हूँ। दुनियाँ भर के मनुष्योँ के हित मेँ सोचता हुआ, जो हो सकता है, करता हुआ। कलम और कानून मेरे हथियार हैं। न्याय और निष्पक्षता मेरा मकसद है।

मैँ हूँ

मैँ हूँ

रविवार, 24 जुलाई 2016

आ गया मैं भी

मित्रों, मैंने ब्लॉग की दुनिया के बारे में बहुत सुन रखा था। आज इसके तिलस्म में दाखिल हो गया हूँ।  कोशिश करूंगा कि जो कुछ सोचूँ , आप तक पहुंचाऊं।  सुना है यहां \बड़ी भूलभुलैया है।  कभी भटकूं तो आप में से कोई भी मित्र रास्ता दिखा सकता है , कृतज्ञ रहूँगा।  धन्यवाद। 

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