मैँ एक...

मैँ एक अदना मनुष्य हूँ। दुनियाँ भर के मनुष्योँ के हित मेँ सोचता हुआ, जो हो सकता है, करता हुआ। कलम और कानून मेरे हथियार हैं। न्याय और निष्पक्षता मेरा मकसद है।

मैँ हूँ

मैँ हूँ

सोमवार, 25 जुलाई 2016

उनकी कोशिश

सुल्तानपुर के इंजीनयरिंग कालेज के एन आई के छात्र पिछले पांच वर्षों से पास पड़ोस के गरीब बच्चों को हास्टल के पीछे खुले आसमान के नीचे एक टीले पर रोज शाम पढ़ाते हैं।बरसात में खुद भीगते हैं, लेकिन तिरपाल तान बच्चों को नहीं भीगने देते।इन दिनों उनकी कक्षाओं में सौ से ऊपर बच्चे पढ़ने आ रहे हैं।ये संख्या पांच सौ के ऊपर तक पहुँच जाती है।इंजीनियरिंग छात्रों का एक बैच पढ़ कर निकलता है और अगला पतवार थाम लेता है।न प्रचार की चाहत न किसी सम्मान का इंतजार।उनकी कोशिश को सलाम।

1 टिप्पणी: